सामवेद (अध्याय 25)
ऊर्ज्जो नपातमा हुवेऽग्निं पावकशोचिषम् । अस्मिन्यज्ञे स्वध्वरे ॥ (२)
हे अग्नि! हम अपने इस यज्ञ में अग्नि को आमंत्रित करते हैं. आप पवित्र व प्रकाशमान हैं. आप ऊर्जा को नीचे नहीं गिरने देते हैं. (२)
O agni! We invite agni to our yagna. You are holy and bright. You don't let the energy fall down. (2)