हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.2.10

अध्याय 25 → खंड 2 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 2
अश्विना वर्तिरस्मदा गोमद्दस्रा हिरण्यवत् । अर्वाग्रथँ समनसा नि यच्छतम् ॥ (१०)
हे अश्विनीकुमारो! आप शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. आप हमें गोवान बनाइए. आप अपने सुनहरे रथ को मन से हमारे यज्ञ में लाने की कृपा कीजिए. (१०)
O Ashwinikumaro! You are going to destroy enemies. You make us Goans. Please bring your golden chariot to our yagna with your heart. (10)