सामवेद (अध्याय 25)
एह देवा मयोभुवा दस्रा हिरण्यवर्त्तनी । उषर्बुधो वहन्तु सोमपीतये ॥ (११)
उषा के साथ उद्बुद्ध (जाग्रत) सुनहरी किरणें, इन सुखमय अश्चिनीकुमारों को सोमपान करने के लिए हमारे यज्ञ में लाने की कृपा करें. (११)
May the golden rays, the golden rays, along with Usha, please bring these happy Ashwini Kumars to our yagna to sompan. (11)