हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.4.3

अध्याय 25 → खंड 4 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 4
यदीं गणस्य रशनामजीगः शुचिरङ्क्ते शुचिभिर्गोभिरग्निः । आद्दक्षिणा युज्यते वाजयन्त्युत्तानामूर्ध्वो अधयज्जुहूभिः ॥ (३)
हे अग्नि! आप बाधाएं व अंधेरे को दूर करते हैं. आप संसार को प्रकाशमान व यजमान घी की आहुतियों से बलवान बनाते हैं. आप ऊर्ध्वगामी हो कर उस घी वाली आहुतियों को स्वीकारते हैं. (३)
O agni! You remove obstacles and darkness. You make the world strong with the offerings of light and host ghee. You go upwards and accept that ghee offerings. (3)