सामवेद (अध्याय 25)
रुशाद्वत्सा रुशती श्वेत्यागादारैगु कृष्णा सदनान्यस्याः । समानबन्धू अमृते अनूची द्यावा वर्णं चरत आमिनाने ॥ (५)
हे उषा! आप सूर्य का चमकीला स्वरूप ले कर पैदा हुई और रात्रि काले रंग का. सूर्य दोनों के समान रूप से बंधु हैं, दोनों अमर हैं. स्वर्गलोक में एक के बाद एक आतीजाती हैं दोनों एकदूसरे का प्रभाव समाप्त करती हैं. (५)
O Usha! You were born with a bright form of the sun and the night is black. Sun is equally brotherly to both, both are immortal. One after the other comes to heaven, both of them end each other's influence. (5)