हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.4.6

अध्याय 25 → खंड 4 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 4
समानो अध्वा स्वस्रोरनन्तस्तमन्यान्या चरतो देवशिष्टे । न मेथेते न तस्थतुः सुमेके नक्तोषासा समनसा विरूपे ॥ (६)
दोनों बहनों (उषा और रात्रि) की एक ही राह है. वह राह अनंत है. उसी राह पर ये दोनों एकदूसरे के पीछे चलती हैं, भले ही इन के स्वरूप एकदूसरे से अलग हैं पर इन के मन समान हैं. ये दोनों अपनेअपने कायो में लगी रहती हैं. (६)
Both sisters (Usha and Ratri) have the same path. That path is infinite. On the same path, these two follow each other, even though their forms are different from each other but their minds are the same. Both of them are engaged in their own work. (6)