सामवेद (अध्याय 25)
आ भात्यग्निरुषसामनीकमुद्विप्राणां देवया वाचो अस्थुः । अर्वाञ्चा नूनँ रथ्येह यातं पीपिवाँसमश्विना घर्ममच्छ ॥ (७)
अन्नि प्रज्वलित हो गए हैं. उषा के प्रकट होते ही अग्नि प्रज्वलित हो जाते हैं. दिव्य प्रार्थनाएं शुरू हो गई हैं. अश्विनीकुमार रथ में विराज गए हैं. हम उन से सोमरस पीने के लिए यज्ञ में पधारने का अनुरोध करते हैं. (७)
Anni has ignited. As soon as Usha appears, the agni ignites. Divine prayers have begun. Ashwinikumar has gone to sit in the chariot. We request them to come to the yagna to drink someras. (7)