हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.5.1

अध्याय 25 → खंड 5 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 5
एता उ त्या उषसः केतुमक्रत पूर्वे अर्धे रजसो भानुमञ्जते । निष्कृण्वाना आयुधानीव धृष्णवः प्रति गावोऽरुषीर्यन्ति मातरः ॥ (१)
हे उषा! आप उजाला फैलाती हैं. आप के आने से पूर्व दिशा में प्रकाश हो जाता है. वीर अपने आयुधों को जैसे चमकाते हैं, वैसे ही आप संसार को चमचमा देती हैं. माता उषा प्रतिदिन आती और जाती हैं. (१)
O Usha! You spread light. The arrival of you gets light in the east direction. Just as heroes shine their weapons, you make the world shine. Mother Usha comes and goes every day. (1)