सामवेद (अध्याय 25)
उदपप्तन्नरुणा भानवो वृथा स्वायुजो अरुषीर्गा अयुक्षत । अक्रन्नुषासो वयुनानि पूर्वथा रुशन्तं भानुमरुषीरशिश्रयुः ॥ (२)
उषा के आते ही लाल किरणें आकाश में छा गई हैं. अपनेआप जुते हुए रथ से वे चेतना फैलाती हैं तथा सूर्य की सेवा करती हैं. (२)
As soon as Usha arrives, red rays have covered the sky. With a chariot plowed on their own, they spread consciousness and serve the sun. (2)