हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.5.6

अध्याय 25 → खंड 5 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 5
अर्वाङ्त्रिचक्रो मधुवाहनो रथो जीराश्वो अश्विनोर्यातु सुष्टुतः । त्रिवन्धुरो मघवा विश्वसौभगः शं न आ वक्षद्द्विपदे चतुष्पदे ॥ (६)
हे अश्विनीकुमारो! आप रथ पर विराज कर यज्ञ में पधारिए. आप का रथ तीन पहियों वाला, मधुर अमृतधारी, द्रुतगामी, अश्वजुत, सराहनीय व तीन लोगों के बैठने की जगह वाला है. वह प्रचुर ऐश्वर्यवान और सौभाग्यवान है. आप सब के प्रति कल्याणकारी भावना रख कर हमारे यज्ञ स्थान में पधारने की कृपा कीजिए. (६)
O Ashwinikumaro! You sit on the chariot and come to the yagna. Your chariot is three-wheeled, sweet amritdhari, fast,ashwajut, commendable and has a seating space for three people. He is abundantly opulent and fortunate. Please have a welfare feeling towards all of you and come to our yajna place. (6)