हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.5.7

अध्याय 25 → खंड 5 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 5
प्र ते धारा असश्चतो दिवो न यन्ति वृष्टयः । अच्छा वाजँ सहस्रिणम् ॥ (७)
हे सोम! आप की झरने वाली धाराएं वैसे ही बरसती हैं, जैसे स्वर्गलोक से बरसात होती है. आप की धाराएं अन्न बरसाती हैं. (७)
O Mon! Your spring streams rain just as it rains from heaven. Your streams rain food. (7)