सामवेद (अध्याय 25)
प्र ते धारा असश्चतो दिवो न यन्ति वृष्टयः । अच्छा वाजँ सहस्रिणम् ॥ (७)
हे सोम! आप की झरने वाली धाराएं वैसे ही बरसती हैं, जैसे स्वर्गलोक से बरसात होती है. आप की धाराएं अन्न बरसाती हैं. (७)
O Mon! Your spring streams rain just as it rains from heaven. Your streams rain food. (7)