सामवेद (अध्याय 26)
अग्निरिन्द्राय पवते दिवि शुक्रो वि राजति । महिषीव वि जायते ॥ (४)
अग्नि इंद्र के लिए प्रज्वलित होती है. वह स्वर्गलोक में विशेष रूप से चमकती हुई शोभित होती है. वह महारानी के समान दिखाई देती है. (४)
Agni ignites for Indra. She is particularly adorned with shining in paradise. She looks like the Queen. (4)