सामवेद (अध्याय 26)
यो जागार तमृचः कामयन्ते यो जागार तमु सामानि यन्ति । यो जागार तमयँ सोम आह तवाहमस्मि सख्ये न्योकाः ॥ (५)
जो जाग्रत हैं, ऋचाएं उन की कामना करती हैं. जो जाग्रत हैं, उन्हें ही सोम प्राप्त होते हैं. जो जाग्रत हैं, उन्हीं से सोम कहते हैं कि मैं तुम्हारा मित्र हूं. (५)
Those who are awake, riches wish for them. Only those who are awake receive soma. Som says to those who are awake that I am your friend. (5)