सामवेद (अध्याय 26)
शिक्षेयमस्मै दित्सेयँ शचीपते मनीषिणे । यदहं गोपतिः स्याम् ॥ (२)
हे शचीपति (इंद्र)! यदि हम गोपति हो जाएं तो अपने इन मनीषी उपासकों को धन देने की इच्छा करें और उन्हें धन भी दें. (२)
This is Shachipati (Indra)! If we become gopatis, then wish to give money to these mystic worshipers of yours and also give them money. (2)