हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 27.1.13

अध्याय 27 → खंड 1 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 27)

सामवेद: | खंड: 1
अमीषां चित्तं प्रतिलोभयन्ती गृहाणाङ्गान्यप्वे परेहि । अभि प्रेहि निर्दह हृत्सु शोकैरन्धेनामित्रास्तमसा सचन्ताम् ॥ (१३)
हे पाप के देवता! आप शत्रुओं के चित्त प्रति लोभी बनाइए. आप शत्रुओं के अंगों को भी कस लीजिए. आप शोकों की ज्वालाओं से शत्रुओं का हृदय दहलाइए. आप घनघोर अंधेरा कर के शत्रु को अचेत (बेहोश) बना दीजिए. (१३)
O God of sin! Make you greedy towards the minds of enemies. You also tighten the limbs of enemies. You shake the hearts of enemies with the flames of sorrow. You make the enemy unconscious by making it dark. (13)