हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 27.1.12

अध्याय 27 → खंड 1 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 27)

सामवेद: | खंड: 1
असौ या सेना मरुतः परेषामभ्येति न ओजसा स्पर्धमाना । तां गूहत तमसापव्रतेन यथैतेषामन्यो अन्यं न जानात् ॥ (१२)
हे मरुदगणो! बल से स्पर्धा करती हुई शत्रुसेना हम पर आक्रमण करे तो आप उस सेना को घने अंधकार से घेर लीजिए, जिस से वे एकदूसरे को पहचान तक न सकें और अपनी ही सेना का संहार कर दें. (१२)
O Marudagano! If the enemy force, competing with force, attacks us, then you surround that army with dense darkness, so that they can not even recognize each other and kill their own army. (12)