सामवेद (अध्याय 27)
वि रक्षो वि मृधो जहि वि वृत्रस्य हनू रुज । वि मन्युमिन्द्र वृत्रहन्नमित्रस्याभिदासतः ॥ (१९)
हे इंद्र! आप राक्षसों व हिंसकों का विनाश करने की कृपा कीजिए. आप वृत्रासुर जैसे राक्षसों की ठोड़ी तोड़ दीजिए. आप अमित्रों का क्रोध और घमंड दूर करने की कृपा कीजिए. (१९)
O Indra! Please destroy demons and violent ones. You break the chin of demons like Vritrasura. Please remove the anger and arrogance of the unfriendly. (19)