हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 27.1.2

अध्याय 27 → खंड 1 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 27)

सामवेद: | खंड: 1
सङ्क्रन्दनेनानिमिषेण जिष्णुना युत्कारेण दुश्च्यवनेन धृष्णुना । तदिन्द्रेण जयत तत्सहध्वं युधो नर इषुहस्तेन वृष्णा ॥ (२)
हे इंद्र! आप शत्रुओं को क्रंदन करा (रुला) देने वाले हैं. आप आलस्यरहित हैं. आप विजेता व निपुण हैं. योद्धा इंद्र की सहायता से युद्ध जीत कर शत्रुओं को भगाते हैं. (२)
O Indra! You are going to cry (cry) to the enemies. You are lazy. You are a winner and an accomplished one. Warriors win the war with the help of Indra and drive away the enemies. (2)