हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 27.1.3

अध्याय 27 → खंड 1 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 27)

सामवेद: | खंड: 1
स इषुहस्तैः स निषङ्गिभिर्वशी सँस्रष्टा स युध इन्द्रो गणेन । सँ सृष्टजित्सोमपा बाहुशर्ध्यू३ग्रधन्वा प्रतिहिताभिरस्ता ॥ (३)
इंद्र युद्ध (विद्या) में दक्ष हैं. वे सृष्टि के विजेता, सोमरस पीने वाले, बाहुबली, धनुर्धारी व शत्रुओं के नाशक हैं. वे तलवार और बाण धारण करने वाले योद्धाओं के सहयोग से शत्रुओं को वशीभूत कर लेते हैं. (३)
Indra is skilled in war (vidya). He is the conqueror of creation, the drinker of Someras, Bahubali, archer and destroyer of enemies. They subjugate enemies with the help of warriors wearing swords and arrows. (3)