सामवेद (अध्याय 27)
यो नः स्वोऽरणो यश्च निष्ट्यो जिघाँसति । देवास्तँ सर्वे धूर्वन्तु ब्रह्म वर्म ममान्तरँ शर्म वर्म ममान्तरम् ॥ (२४)
जो हमारे अपने हो कर विश्वासपूर्वक छल से हमें मारना चाहते हैं, देवगण उन सभी धूर्तो को नष्ट करने की कृपा करें. वेदों के मंत्र हमारे मर्मस्थान के कवच हैं. वे हमें सुख प्रदान करने की कृपा करें. (२४)
Those who want to kill us with deceit with faith, may the Gods be pleased to destroy all those cunning. The mantras of the Vedas are the armor of our place. May they please give us happiness. (24)