हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 27.1.25

अध्याय 27 → खंड 1 → मंत्र 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 27)

सामवेद: | खंड: 1
मृगो न भीमः कुचरो गिरिष्ठाः परावत आ जगन्था परस्याः । सृकँ सँशाय पविमिन्द्र तिग्मं वि शत्रूं ताढि वि मृधो नुदस्व ॥ (२५)
हे इंद्र! आप पर्वत में रहने वाले शेर के समान भयंकर हैं. दूर से यहां आ कर दूर तक मारक तीखे वञ् से शत्रुओं का नाश करने की कृपा कीजिए. आप लड़ाकू शत्रुओं को दूर करने की कृपा कीजिए. (२५)
O Indra! You are as fierce as a lion living in the mountain. Please come here from a distance and destroy the enemies with a sharp weapon from far away. Please remove the fighting enemies. (25)