हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.1.10

अध्याय 3 → खंड 1 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 1
मा चिदन्यद्वि शँसत सखायो मा रिषण्यत । इन्द्रमित्स्तोता वृषणँ सचा सुते मुहुरुक्था च शँसत ॥ (१०)
हे यजमानो! आप इंद्र के अलावा किसी अन्य देव की स्तुति मत करो. बेकार मेहनत मत करो. एक साथ सोम यज्ञ में बलवान इंद्र की ही स्तुति करो. उन्हीं के बारे में प्रार्थनाओं को बारबार उचारो. (१०)
O hosts! Don't praise any god other than Indra. Don't work hard. Praise the strong Indra in the Soma Yagya together. Pray about them again and again. (10)