हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.10.1

अध्याय 5 → खंड 10 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 10
इन्द्रमच्छ सुता इमे वृषणं यन्तु हरयः । श्रुष्टे जातास इन्दवः स्वर्विदः ॥ (१)
सोमरस बहुत जल्दी तैयार किया गया है. यह ज्ञान की बढ़ोतरी करने वाला और हरा है. यह शीघ्र ही इच्छा पूर्ण करने वाले शक्तिमान इंद्र के पास पहुंचे. (१)
Somers has been prepared very quickly. It is knowledge-enhancing and green. It soon reached shaktiman Indra, who fulfilled the wish. (1)