सामवेद (अध्याय 5)
प्र धन्वा सोम जागृविरिन्द्रायेन्दो परि स्रव । द्युमन्तँ शुष्ममा भर स्वर्विदम् ॥ (२)
हे सोम! आप उत्साह और फुर्ती देने वाले हैं. आप इंद्र के पीने के लिए इस कलश में प्रवेश कीजिए. आप हमें प्रकाशवान और ज्ञानवान बनाइए. (२)
O Mon! You are encouraging and agile. You enter this kalash for Indra to drink. You make us light and knowledgeable. (2)