हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.10.8

अध्याय 5 → खंड 10 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 10
प्र पुनानाय वेधसे सोमाय वच उच्यते । भृतिं न भरा मतिभिर्जुजोषते ॥ (८)
पवित्र तथा कर्म करने वाले सोम के लिए प्रार्थनाएं की जाती हैं. सेवक की सेवा से जैसे हम प्रसन्न हो जाते हैं, वैसे ही विशेष प्रार्थनाओं से हम उन को प्रसन्न करें. (८)
Prayers are offered for the holy and deed soma. Just as we are pleased with the service of the servant, so let us please them with special prayers. (8)