हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.2.1

अध्याय 5 → खंड 2 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 2
प्र सोमासो मदच्युतः श्रवसे नो मघोनः । सुता विदथे अक्रमुः ॥ (१)
हे सोम! आप प्रसन्नता बढ़ाने वाले हैं. आप को हवि देने के लिए निचोड़ा गया है. आप को अन्न और यश प्राप्ति के उद्देश्य से इन कलशीं में भरा गया है. (१)
O Mon! You are going to increase happiness. You've been squeezed to give havi. You have been filled in these urshi for the purpose of getting food and fame. (1)