हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.2.3

अध्याय 5 → खंड 2 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 2
पवस्वेन्दो वृषा सुतः कृधी नो यशसो जने । विश्वा अप द्विषो जहि ॥ (३)
हे सोम! आप बल और इच्छा पूर्ति के लिए निचोड़े गए हैं. आप हमें यशस्वी बनाइए. आप हमारे सभी शत्रुओं को नष्ट कीजिए. (३)
O Mon! You are squeezed for force and wish fulfillment. You make us successful. You destroy all our enemies. (3)