हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.4.13

अध्याय 5 → खंड 4 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 4
प्र ण इन्दो महे तु न ऊर्मिं न बिभ्रदर्षसि । अभि देवाँ अयास्यः ॥ (१३)
हे सोम! बहुत धन पाने के लिए हम मटकों में आप को छानते हैं. अयास्य ऋषि देव पूजन के लिए आप की लहरों को धारण करते हुए गाते हैं. (१३)
O Mon! To get a lot of money, we filter you in matkas. Ayasya Rishi sings while wearing your waves for Dev Pujan. (13)