हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.4.14

अध्याय 5 → खंड 4 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 4
अपघ्नन्पवते मृधोऽप सोमो अराव्णः । गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतम् ॥ (१४)
हे सोम! आप शत्रु व धन न देने वालों के भी नाशक हैं. सोम इंद्र के पास जाने के लिए छनछन कर टपक रहे हैं. (१४)
O Mon! You are also the destroyer of enemies and those who do not give money. Som is dripping to go to Indra. (14)