सामवेद (अध्याय 5)
इषे पवस्व धारया मृज्यमानो मनीषिभिः । इन्दो रुचाभि गा इहि ॥ (९)
हे सोम! विद्वान् यजमान आप को निचोड़ते व छाननते हैं. हमें अन्न रस प्राप्त कराने के लिए आप धारा के रूप में छनते हुए कलश में पधारिए. आप गौ आदि पशुओं को प्राप्त होइए. (९)
O Mon! The learned host squeezes and filters you. To get us food juice, you come to the urn filtered in the form of a stream. You get cows etc. animals. (9)