सामवेद (अध्याय 5)
सोमः पवते जनिता मतीनां जनिता दिवो जनिता पृथिव्याः । जनिताग्नेर्जनिता सूर्यस्य जनितेन्द्रस्य जनितोत विष्णोः ॥ (५)
सोमरस बुद्धिदायी, स्वर्गलोक को प्रकाशित करने वाला, पृथ्वी को पुष्ट करने वाला व आनंददायी है. वह अग्नि, इंद्र और विष्णु को आनंद देने वाला है. इसे पात्र में तैयार किया जाता है. (५)
Someras is intelligent, illuminating the land of heaven, strengthening the earth and enjoying. He is going to give joy to Agni, Indra and Vishnu. It is prepared in the vessel. (5)