हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.7.12

अध्याय 5 → खंड 7 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 7
अपामिवेदूर्मयस्तर्त्तुराणाः प्र मनीषा ईरते सोममच्छ । नमस्यन्तीरुप च यन्ति सं चाच विशन्त्युशतीरुशन्तम् ॥ (१२)
तेजी से उठने वाली लहरों की तरह यजमान की स्तुतियां उठती हैं. यजमान जल्दी से जल्दी अपनी स्तुति देवता के पास पहुंचाना चाहते हैं. स्तुतियां देवता की प्रशंसा करती हैं, उन के पास पहुंचती हैं और उन्हीं में एकमेक हो जाती हैं. (१२)
Like the fast-rising waves, praises of the host rise. The host wants to convey his praise to the deity as soon as possible. Praises praise the deity, reach out to him and become one in him. (12)