हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 6.5.10

अध्याय 6 → खंड 5 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 6)

सामवेद: | खंड: 5
प्रत्यङ् देवानां विशः प्रत्यङ्ङुदेषि मानुषान् । प्रत्यङ् विश्वँ स्वर्दृशे ॥ (१०)
हे सूर्य! आप मरुदगणों के देखते हुए उन के सामने उदित होते हैं. आप मनुष्यों के देखते हुए उदित होते हैं. आप सभी के देखते हुए यानी सब के सामने प्रकट होते हैं. (१०)
O sun! You rise in front of the deserts while looking at them. You rise when you look at humans. You appear in front of everyone. (10)