हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 6.5.7

अध्याय 6 → खंड 5 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 6)

सामवेद: | खंड: 5
अप त्ये तायवो यथा नक्षत्रा यन्त्यक्तुभिः । सूराय विश्वचक्षसे ॥ (७)
दिन में जैसे चोर छिप जाते हैं, वैसे ही सूर्य के उगने पर ग्रह, नक्षत्र, तारागण आदि छिप जाते हैं. (७)
Just as thieves hide during the day, planets, constellations, stars, etc. are hidden when the sun rises. (7)