सामवेद (अध्याय 6)
अदृश्रन्नस्य केतवो वि रश्मयो जनाँ अनु । भ्राजन्तो अग्नयो यथा ॥ (८)
जैसे हम जलती हुई अग्नि की ज्वाला देख सकते हैं, वैसे ही सूर्य की प्रकाशित किरणों को हम देख सकते हैं. वे सब को देख सकती हैं. (८)
Just as we can see the flame of burning agni, so we can see the illuminated rays of the sun. They can see everyone. (8)