हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 7.1.7

अध्याय 7 → खंड 1 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 7)

सामवेद: | खंड: 1
पवमानस्य ते कवे वाजिन्त्सर्गा असृक्षते । अर्वन्तो न श्रवस्यवः ॥ (७)
हे सोम! आप शक्तिवर्धक हैं. छानते समय आप की धार ऐसी गतिशील होती है, जैसे अस्तबल से निकलते समय घोड़े गतिशील होते हैं. (७)
O Mon! You are powerful. While filtering, your edge is as dynamic as horses are moving when leaving the stables. (7)