हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 7.2.5

अध्याय 7 → खंड 2 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 7)

सामवेद: | खंड: 2
उरुशँसा नमोवृधा मह्ना दक्षस्य राजथः । द्राघिष्ठाभिः शुचिव्रता ॥ (५)
हे मित्रावरुण! आप पवित्र कार्य करने वाले हैं. आप अनेक लोगों से प्रशंसित हैं. हवि के अन्न से आप बढ़ते हैं. आप अपनी शक्ति से सुशोभित होते हैं. (५)
This friend! You are going to do holy work. You are admired by many people. You grow with the food of Havi. You are adorned with your power. (5)