हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 7.5.14

अध्याय 7 → खंड 5 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 7)

सामवेद: | खंड: 5
अव द्युतानः कलशाँ अचिक्रदन्नृभिर्येमाणः कोश आ हिरण्यये । अभी ऋतस्य दोहना अनूषताधि त्रिपृष्ठ उषसो वि राजसि ॥ (१४)
यजमान सोने के कलश में सोमरस को छानते हैं. कलश में जाते समय सोमरस आवाज करता है. इस सोमरस की यजमान उपासना करते हैं. सोमरस सुबह, दोपहर और शाम-इन तीनों सवनों (संध्याओं) में प्रकाशित होता है. (१४)
The hosts filter someras in a gold urn. Someras makes a sound while going to the urn. The host worships this Someras. Someras is illuminated in the morning, afternoon and evening in these three savanas (evenings). (14)