सामवेद (अध्याय 8)
अस्य प्रत्नामनु द्युतँ शुक्रं दुदुह्रे अह्रयः । पयः सहस्रसामृषिम् ॥ (१)
सोमरस चमकीला, ज्ञान बढ़ाने वाला व मनोकामना पूरी करने वाला है. ऋषियों ने इस के सहस्र स्वरूप का स्मरण कर के इसे तैयार किया है. (१)
Someras is bright, knowledge-enhancing and fulfilling desires. The sages have prepared it by remembering its sahasra form. (1)