हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 8.5.2

अध्याय 8 → खंड 5 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 8)

सामवेद: | खंड: 5
अयँ सूर्य इवोपदृगयँ सराँसि धावति । सप्त प्रवत आ दिवम् ॥ (२)
सोम सात धाराओं से उसी प्रकार दौड़ते हैं (प्रवाहित होते हैं), जिस तरह सूर्य स्वर्गलोक से सात किरणों से धरती पर आने के लिए दौड़ते हैं. (२)
Soma runs (flows) from the seven streams in the same way as the Sun runs from heaven to come to earth with seven rays. (2)