सामवेद (अध्याय 9)
त्वँ समुद्रिया अपोऽग्रियो वाच ईरयन् । पवस्व विश्वचर्षणे ॥ (२)
हे सोम! आप सभी के कर्मो को ध्यान से देखने वाले हैं. आप अग्रगण्य स्तुतियों के प्रेरक हैं. अंतरिक्ष के जल आप को प्राप्त होते हैं. (२)
O Mon! You are going to watch everyone's deeds carefully. You are the motivator of leading praises. The waters of space are received by you. (2)