सामवेद (अध्याय 9)
वृष्णस्ते वृष्ण्यँ शवो वृषा वनं वृषा सुतः । स त्वं वृषन्वृषेदसि ॥ (८)
हे सोम! आप शक्तिशाली, बहुत सामर्थ्यवान हैं. आप की सेवा भी शक्तिवर्धक है. आप का रस एवं आप स्वयं भी बलवर्द्धक हैं. (८)
O Mon! You are powerful, very powerful. Serving you is also powerful. Your juice and you yourself are also strong. (8)