हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 9.5.2

अध्याय 9 → खंड 5 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 9)

सामवेद: | खंड: 5
जघ्निर्वृत्रममित्रियँ सस्निर्वाजं दिवेदिवे । गोषातिरश्वसा असि ॥ (२)
हे सोम! आप वृत्रासुर अमित्रों (शत्रुओं) के नाशक, दिव्य व संघर्षशील हैं. आप गोधन व अश्वधन प्रदान करते हैं. (२)
O Mon! You are the destroyer, divine and struggling of Vritrasura unfriendly (enemies). You provide godhan and ashwadhan. (2)