हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 9.5.3

अध्याय 9 → खंड 5 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 9)

सामवेद: | खंड: 5
सम्मिश्लो अरुषो भुवः सूपस्थाभिर्न धेनुभि । सीदं च्छ्येनो न योनिमा ॥ (३)
हे सोम! बाज जैसे घोंसले में सुशोभित होता है, उसी प्रकार आप अपने सदन में सुशोभित होते हैं. आप गायों के दूध में मिलने पर चमचमाते हैं. (३)
O Mon! Just as the eagle is adorned in a nest, so you are adorned in your house. You gleam when you get into the milk of cows. (3)