यजुर्वेद (अध्याय 1)
अ॒ग्नेस्त॒नूर॑सि वा॒चो वि॒सर्ज॑नं दे॒ववी॑तये त्वा गृह्णामि बृ॒हद् ग्रा॑वासि वानस्प॒त्यः सऽइ॒दं दे॒वेभ्यो॑ ह॒विः श॑मीष्व सु॒शमि॑ शमीष्व। हवि॑ष्कृ॒देहि॒ हवि॑ष्कृ॒देहि॑ ॥ (१५)
हे मनुष्यो! हवि को मंत्रों के साथ (अग्नि में) देवताओं के लिए विसर्जित किया जाता है. हे हवि! आप अग्नि देव का शरीर हो. हवि को तैयार करने वाला ओखल और मूसल विशाल (बड़े) पत्थर और वनस्पति से तैयार किया जाता है. इन से देवताओं के लिए हवि तैयार की जाती है. देवताओं को हवि भेंट करने के लिए मूसल ग्रहण किया जाता है. मूसल श्रेष्ठ हवि तैयार कर के देवताओं को सुख प्रदान करें. हे मूसल! आप हवि तैयार करने के लिए आइए (पधारिए). (१५)
O men! Havi is immersed for the gods (in the agni) with mantras. Oh yes! You are the body of agni dev. The oak and pestle that prepare the havi are prepared from huge (large) stone and vegetation. From these, havi is prepared for the gods. Pestle is taken to offer havi to the gods. Prepare the best havi and give happiness to the gods. O pestle! You come (come to prepare the havi). (15)