यजुर्वेद (अध्याय 10)
अ॒श्विभ्यां॑ पच्यस्व॒ सर॑स्वत्यै पच्य॒स्वेन्द्रा॑य सु॒त्राम्णे॑ पच्यस्व। वा॒युःपू॒तः प॒वित्रे॑ण प्र॒त्यङ्क्सोमो॒ अति॑स्रुतः। इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑ ॥ (३१)
आप दोनों अश्विनीकुमारों के लिए परिपक्व होइए. आप सरस्वती देवी के लिए परिपक्व होइए. इंद्र देव अन्य देवताओं को योजित करते हैं. आप इंद्र देव के लिए परिपक्व होइए. वायु से पवित्र सोम का यज्ञ में श्रबण हो रहा है. सोम इंद्र देव से जुड़े हुए हैं. सोम इंद्र देव के मित्र (सखा) हैं. (३१)
You two mature for Ashwinikumars. You mature for Saraswati Devi. Indra Dev employs other gods. You mature for Indra Dev. The holy Soma is being immersed in the yagna from the air. Som is associated with Indra Dev. Som is a friend (sakha) of Indra Dev. (31)