यजुर्वेद (अध्याय 11)
आ त्वा॑ जिघर्मि॒ मन॑सा घृ॒तेन॑ प्रतिक्षि॒यन्तं॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑। पृ॒थुं ति॑र॒श्चा वय॑सा बृ॒हन्तं॒ व्यचि॑ष्ठ॒मन्नै॑ रभ॒सं दृशा॑नम् ॥ (२३)
हे अग्नि! आप आइए, पधारिए. आप अखिल विश्व में व्यापिए. हम मन से, घी से आप के प्रज्वलित होने की प्रतीक्षा करते हैं. आप तिरछी वय से सब ओर व्यापते हैं. आप दर्शनीय व सधे हुए मन वाले हैं. (२३)
O agni! Come on, come. You travel all over the world. We sincerely wait for you to ignite with ghee. You are everywhere with a slanted age. You are visible and have a strong mind. (23)