यजुर्वेद (अध्याय 11)
परि॒ वाज॑पतिः क॒विर॒ग्निर्ह॒व्यान्य॑क्रमीत्। दध॒द् रत्ना॑नि दा॒शुषे॑ ॥ (२५)
अग्नि अन्नदाता, कवि और हविदाता को धन देने वाले हैं. आप यजमान को देने के लिए रत्न धारण करते हैं. (२५)
Agni is the giver of wealth to annadata, poet and havidata. You wear gems to give to the host. (25)