हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 11.31

अध्याय 11 → मंत्र 31 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
संव॑साथास्व॒र्विदा॑ स॒मीची॒ऽउर॑सा॒ त्मना॑। अ॒ग्निम॒न्तर्भ॑रि॒ष्यन्ती॒ ज्योति॑ष्मन्त॒मज॑स्र॒मित् ॥ (३१)
आप अग्नि को अपने में बसाइए. अग्नि स्वयं प्रकाशवान हैं. आप उस (हृदय) में प्रज्वलित होते हैं. आप ज्योतिमान व अजस्र प्रकाशित होते हैं. (३१)
You settle the agni in yourself. Fire itself is light. You ignite in that (heart). You light up the flame and the light. (31)