हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 11.55

अध्याय 11 → मंत्र 55 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
सꣳसृ॑ष्टां॒ वसु॑भी रु॒द्रैर्धीरैः॑ कर्म॒ण्यां मृद॑म्। हस्ता॑भ्यां मृ॒द्वीं कृ॒त्वा सि॑नीवा॒ली कृ॑णोतु॒ ताम् ॥ (५५)
धैर्यशाली बसुओं और रुद्रगणों द्वारा कर्मपूर्वक मिटूटी सिरजी गई है (तैयार की गई है). सिनीवाली देवी हाथों से उस मिट्टी को पात्र बनाने लायक तैयार करें तथा पात्र बनाने की कृपा करें. (५५)
Mituti sirji has been done (prepared) by the patient Basus and Rudraganas. Siniwali Devi should prepare that soil to make a vessel with her hands and please make the vessel. (55)